यूरोपीय धर्मसुधार
- अवधि
- 1517
- नक्शा
- धर्म मानचित्र
यूरोपीय धर्मसुधार अथवा रिफॉरमेशन, 16वीं शताब्दी के प्रारंभ में समस्त पश्चिमी यूरोप धार्मिक दृष्टि से एक था - सभी ईसाई थे; सभी रोमन काथलिक कलीसिया (चर्च) के सदस्य थे; उसकी परंपरगत शिक्षा मानते थे और धार्मिक मामलों में उसके अध्यक्ष अर्थात् रोम के पोप का शासन स्वीकार करते थे। यह 16वीं शताब्दी के उस महान आंदोलन को कहते हैं जिसके फलस्वरूप पाश्चात्य ईसाइयों की यह एकता छिन्न-भिन्न हुई और प्रोटेस्टैंट धर्म का उदय हुआ। ईसाई कलीसिया के इतिहस में समय-समय पर सुधारवादी आंदोलन होते रहे किंतु वे कलीसिया के धार्मिक सिद्धातों अथवा उसके शासकों को चुनौती न देकर उनके निर्देश के अनुसार ही नैतिक बुराइयों का उन्मूलन तथा धार्मिक शिक्षा का प्रचार अपना उद्देश्य मानते थे। 16वीं शताब्दी में जो सुधार का आंदोलन प्रवर्तित हुआ वह शीघ्र ही कलीसिया की परंपरागत शिक्षा और उसके शासकों के अधिकार, दोनों का विरोध करने लगा।
स्रोत: विकिपीडिया — यूरोपीय धर्मसुधार · CC BY-SA 4.0
आसपास की पहले और बाद की घटनाएँ
- 9ट्यूटोबर्ग वन का युद्ध
- लगभग 789Carolingian Renaissance
- लगभग 1450मुद्रणालय
- 1517यूरोपीय धर्मसुधारयह पृष्ठ
- 1517लूथर की पंचानवे थीसिस
- 1543डी रिवोल्यूशनिबस ऑर्बियम कोलेस्टियम
- 1648वेस्टफेलिया की संधि
इस भूमि पर किसने शासन किया
ऐतिहासिक सीमा डेटा (Cliopatria) के अनुसार यह स्थान जिन राज्यों में था। वर्ष डेटा के अंतराल (कुछ वर्षों से एक सदी) के अनुसार अनुमानित हैं। उस वर्ष का नक्शा देखने के लिए टैप करें।