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त्रिपिटक कोरिया

अवधि
1251
नक्शा
आविष्कार मानचित्र

त्रिपिटक कोरिया या त्रिपिटक कोरियाना या पालमान दाएजांग्गयेओंग बौद्ध त्रिपिटक धर्मग्रंथों का एक ऐतिहासिक कोरियाई संग्रह है। इसे 13वीं सदी ईसवी में 81,258 काठ के छपाई सांचों पर तराशा गया था। यह कोरियाई भाषा की हांजा लिपि में विश्व का सबसे पुराना और सम्पूर्ण त्रिपिटक है। कुल मिलाकार इसमें 5,23,82,960 अक्षर हैं जिन्हें 1,496 विषयों में और 6,568 अध्यायों में आयोजित किया गया है। हर छपाई सांचा 70 सेमी चौड़ा और 24 सेमी लम्बा है। इनकी मोटाई 2.6 से 4 सेमी तक है और हर एक का वज़न 3 से 4 किलो के बीच में है। इस पूरे संग्रह को दक्षिण कोरिया के दक्षिण ग्येओंगसांग प्रांत में स्थित हएइंसा बौद्ध मंदिर में सुरक्षित रखा गया है। 'त्रिपिटक' संस्कृत भाषा का शब्द है जिसका अर्थ 'तीन पेटियाँ' होता है और यह बौद्ध धर्म शिक्षा के तीन स्तंभों को कहा जाता है - सूत्र, विनय और अभिधर्म ।

स्रोत: विकिपीडिया — त्रिपिटक कोरिया · CC BY-SA 4.0

आसपास की पहले और बाद की घटनाएँ

  1. 918गोर्यो
  2. 1019ग्विजू का युद्ध
  3. 1231 – 1270कोरिया पर मंगोल आक्रमण
  4. 1251त्रिपिटक कोरियायह पृष्ठ
  5. 1251त्रिपिटक कोरिया
  6. 1377जिकजी
  7. 1392जोसॉन राजवंश की स्थापना

इस भूमि पर किसने शासन किया

ऐतिहासिक सीमा डेटा (Cliopatria) के अनुसार यह स्थान जिन राज्यों में था। वर्ष डेटा के अंतराल (कुछ वर्षों से एक सदी) के अनुसार अनुमानित हैं। उस वर्ष का नक्शा देखने के लिए टैप करें।

इस अवधि के अन्य मानचित्र

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