दुनिया: 1960 का दशक
1960–1969
मानचित्र पर देखेंइस काल की घटनाएँ 22
1962 · उत्तर अमेरिका · राजनीति
क्यूबाई मिसाइल संकट
क्यूबाई मिसाइल संकट शीत युद्ध के दौरान अक्टूबर 1962 में सोवियत संघ, क्यूबा और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच एक टकराव था। सितंबर 1962 में, क्यूबा और सोवियत सरकारों ने चोरी-छिपे क्यूबा में महाद्वीपीय संयुक्त राज्य अमेरिका के अधिकांश भागों पर मार कर सकने की क्षमता वाली अनेक मध्यम- और मध्यवर्ती-दूरी की प्राक्षेपिक मिसाइलें लगानी शुरू की। 1958 में यूके (UK) में थोर आईआरबीएम (IRBM) और 1961 में इटली और तुर्की में जुपिटर आईआरबीएम (IRBM)- मॉस्को पर नाभिकीय हथियारों से हमला करने की क्षमता वाली इन 100 से अधिक यू॰एस॰ (U.S.)-निर्मित मिसाइलों की तैनाती के प्रतिक्रियास्वरूप यह कारवाई की गयी। 14 अक्टूबर 1962 को, एक संयुक्त राज्य अमेरिकी यू-2 (U-2) फोटोआविक्षण विमान ने क्यूबा में निर्माणाधीन सोवियत मिसाइल ठिकानों के फोटोग्राफिक सबूत जमा किये।
1969 · उत्तर अमेरिका · विज्ञान
अपोलो 11 का चंद्रमा पर उतरना
अपोलो 11 वह अंतरिक्ष उड़ान थी जिसने चंद्रमा पर पहले इंसान, नील आर्मस्ट्रांग और ऐडविन "बज़" ऐल्ड्रिन जुनियर को 20 जुलाई 1969 को अन्तरराष्ट्रीय समय के अनुसार 20:17:39 बजे उतारा था। संयुक्त राज्य अमेरिका का यह मिशन मानव इतिहास व अन्तरिक्ष अनुसन्धान के इतिहास में एक बडी उपलब्धी के रूप में देखा जाता है।
1960 · अफ़्रीका · राजनीति
अफ़्रीका वर्ष
1960 में सत्रह अफ़्रीकी देशों के स्वतंत्र होने की घटनाओं के कारण इस वर्ष को अफ़्रीका वर्ष कहा जाता है। इसने अफ़्रीकी स्वतंत्रता आंदोलनों की परिणति और महाद्वीप में बढ़ती अखिल-अफ़्रीकी भावना को दर्शाया, तथा संयुक्त राष्ट्र में अफ़्रीका एक प्रमुख शक्ति के रूप में उभरा।
1961 · मध्य एशिया · विज्ञान
वोस्तोक 1
वोस्तोक 1 इतिहास में पहली मानवयुक्त अंतरिक्ष उड़ान और वोस्तोक कार्यक्रम की पहली अंतरिक्ष उड़ान थी। वोस्तोक-3केए अंतरिक्ष कैप्सूल सोवियत अंतरिक्ष यात्री यूरी गगारिन के साथ 12 अप्रैल 1961 बायकोनूर कॉसमोड्रोम से लांच किया गया था। इसी के साथ यूरी गगारिन पहले ऐसे व्यक्ति बने जो में अंतरिक्ष पहली बार गए।
1964 · उत्तर अमेरिका · राजनीति
नागरिक अधिकार अधिनियम 1964
1964 में संयुक्त राज्य अमेरिका में पारित ऐतिहासिक कानून, जिसने नस्ल, रंग, धर्म, लिंग और राष्ट्रीय मूल के आधार पर भेदभाव को अवैध घोषित किया। इसने स्कूलों और सार्वजनिक स्थानों में नस्लीय पृथक्करण तथा रोज़गार में भेदभाव पर रोक लगाई।
1965 – 1966 · दक्षिण-पूर्व एशिया · राजनीति
1965–66 का इंडोनेशियाई नरसंहार
अक्टूबर 1965 से मार्च 1966 तक इंडोनेशिया में मुख्यतः इंडोनेशियाई कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्यों और कथित समर्थकों को निशाना बनाकर बड़े पैमाने पर हत्याएँ हुईं। ट्रेड यूनियन सदस्य, चीनी मूल के लोग और वामपंथी भी इसके शिकार बने, और इसके बाद सुहार्तो का सैन्य-समर्थित शासन स्थापित हुआ।
1966 – 1976 · चीन · राजनीति
सांस्कृतिक क्रांति
सांस्कृतिक क्रांति जनवादी गणराज्य चीन में माओ त्से-तुंग द्वारा चलाया गया एक सामाजिक-राजनीतिक आन्दोलन था सन् १९६६ से आरम्भ होकर सन् १९७६ तक चला। माओ उस समय चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के अध्यक्ष थे। 16 मई 1966 को शुरू हुई यह क्रांति 10 वर्षों तक चली और इसने चीन के सामाजिक ढांचे में कई बड़े परिवर्तन किए। इस क्रांति की शुरुआत की घोषणा करते हुए माओ-त्से-तुंग ने चेतावनी दी थी कि बुर्जुआ वर्ग कम्युनिस्ट पार्टी में अपना प्रभाव क़ायम करके एक तरह की तानाशाही स्थापित करना चाहता है। वास्तव में सांस्कृतिक क्रांति का अभियान माओ ने अपनी पार्टी को प्रतिद्वंद्वियों से छुटकारा दिलाने के लिए शुरू किया था।
1967 · मध्य पूर्व · युद्ध
छः दिन का युद्ध
छः दिवसीय युद्ध इजराइल तथा उसके पड़ोसी देशों - मिस्र, जॉर्डन तथा सीरिया के बीच लड़ा गया था।
1968 · यूरोप · राजनीति
प्राग वसंत
प्राग स्प्रिंग, या 1968 का प्राग वसंत, चेकोस्लोवाकिया में एक राजनीतिक सुधार आंदोलन था। यह जनवरी 1968 से अगस्त 1968 तक चला, और इसका उद्देश्य कठोर स्तालिनवादी नीतियों को समाप्त कर समाजवादी लोकतंत्र की स्थापना करना था। इस आंदोलन का नेतृत्व एलेक्ज़ेंडर डुबचेक ने किया। हालाँकि, इस आंदोलन को अगस्त 1968 में सोवियत संघ और वारसा संधि के अन्य सदस्यों के सैन्य हस्तक्षेप से कुचल दिया गया।
1969 · उत्तर अमेरिका · विज्ञान
अरपानेट
साँचा:Infobox telecommunications network
1960 · कोरिया · राजनीति
अप्रैल क्रांति (दक्षिण कोरिया)
11 से 26 अप्रैल 1960 तक दक्षिण कोरिया में राष्ट्रपति ई सुंग-मान (सिंगमैन री) और प्रथम गणराज्य के विरुद्ध चुनावी धांधली को लेकर हुए व्यापक जन-प्रदर्शन। 19 अप्रैल के बड़े प्रदर्शनों के बाद राष्ट्रपति को इस्तीफ़ा देना पड़ा, और इसे कोरियाई लोकतंत्र का महत्वपूर्ण पड़ाव माना जाता है।
1961 · कोरिया · राजनीति
16 मई का सैन्य तख़्तापलट
16 मई 1961 को दक्षिण कोरिया में पार्क चुंग-ही और उनके सहयोगी सैन्य अधिकारियों ने तख़्तापलट कर सत्ता पर कब्ज़ा किया। इसने प्रधानमंत्री चांग म्योन की लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार को अपदस्थ कर दिया और लंबे सैन्य-समर्थित शासन की शुरुआत की।
1962 · भारत · युद्ध
भारत-चीन युद्ध
भारत-चीन युद्ध जो भारत चीन सीमा विवाद के रूप में भी जाना जाता है, चीन और भारत के बीच 1962 में हुआ एक युद्ध था। विवादित हिमालय सीमा युद्ध के लिए एक मुख्य बहाना था, लेकिन अन्य मुद्दों ने भी भूमिका निभाई। चीन में 1959 के तिब्बती विद्रोह के बाद जब भारत ने दलाई लामा को शरण दी तो भारत चीन सीमा पर हिंसक घटनाओं की एक श्रृंखला शुरू हो गयी। भारत ने फॉरवर्ड नीति के तहत मैकमोहन रेखा से लगी सीमा पर अपनी सैनिक चौकियाँ रखी जो 1959 में चीनी प्रीमियर झ़ोउ एनलाई के द्वारा घोषित लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल के पूर्वी भाग के उत्तर में थी।
1963 · अफ़्रीका · राजनीति
अफ़्रीकी एकता संगठन की स्थापना
25 मई 1963 को इथियोपिया के अदीस अबाबा में 33 अफ़्रीकी सरकारों के हस्ताक्षर से अफ़्रीकी एकता संगठन की स्थापना हुई। इसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच राजनीतिक और आर्थिक एकीकरण को बढ़ावा देना तथा अफ़्रीका से उपनिवेशवाद और नव-उपनिवेशवाद को समाप्त करना था; 2002 में इसका स्थान अफ़्रीकी संघ ने लिया।
1964 · जापान · विज्ञान
तोकाइदो शिनकान्सेन
तोकाइदो शिनकान्सेन जापान की शिनकान्सेन तीव्रगामी रेल प्रणाली का एक मार्ग है। १९६४ से संचालित यह विश्व की प्रथम उच्चगति रेल लाइन है। ५१५ किमी लंबा यह मार्ग जापान की राजधानी टोक्यो को ओसाका शहर से जोड़ता है। सन्यो शिनकान्सेन मार्ग के माध्यम से टोक्यो से सीधे फुकुओका तक यात्रा संभव है।
1964 · दक्षिण अमेरिका · राजनीति
1964 का ब्राज़ीली तख़्तापलट
31 मार्च से 1 अप्रैल 1964 के बीच ब्राज़ील की सेना ने राष्ट्रपति जोआओ गुलार्ट को अपदस्थ कर दिया। इससे चौथे ब्राज़ीलियाई गणराज्य का अंत हुआ और 1985 तक चली सैन्य तानाशाही की शुरुआत हुई।
1965 · भारत · युद्ध
१९६५ का भारत-पाक युद्ध
१९६५ का भारत-पाक युद्ध उन मुठभेड़ों का नाम है जो दोनों देशों के बीच अप्रैल १९६५ से सितम्बर १९६५ के बीच हुई थी। इसे कश्मीर के दूसरे युद्ध के नाम से भी जाना जाता है। भारत और पाकिस्तान के बीच जम्मू और कश्मीर राज्य पर अधिकार के लिये बँटवारे के समय से ही विवाद चल रहा है। १९४७ में भारत-पाकिस्तान के बीच प्रथम युद्ध भी कश्मीर के लिये ही हुआ था। इस लड़ाई की शुरूआत पाकिस्तान ने अपने सैनिकों को घुसपैठियों के रूप में भेज कर इस उम्मीद में की थी कि कश्मीर की जनता भारत के खिलाफ विद्रोह कर देगी। इस अभियान का नाम पाकिस्तान ने युद्धभियान जिब्राल्टर रखा था। पांच महीने तक चलने वाले इस युद्ध में दोनों पक्षों के हजारों लोग मारे गये। इस युद्ध का अंत संयुक्त राष्ट्र के द्वारा युद्ध विराम की घोषणा के साथ हुआ और ताशकंद में दोनों पक्षों में समझौता हुआ।
1965 · दक्षिण-पूर्व एशिया · राजनीति
सिंगापुर की स्वतंत्रता की घोषणा
9 अगस्त 1965 को सिंगापुर मलेशिया संघ से अलग होकर स्वतंत्र और संप्रभु देश बना। पहले प्रधानमंत्री ली कुआन यू ने स्वतंत्रता घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए; 1963 में संघ में शामिल होने के लगभग दो वर्ष बाद यह अलगाव हुआ।
1967 · दक्षिण-पूर्व एशिया · राजनीति
आसियान घोषणा
8 अगस्त 1967 को बैंकॉक में इंडोनेशिया, मलेशिया, फ़िलीपींस, सिंगापुर और थाईलैंड के विदेश मंत्रियों ने इस घोषणा पर हस्ताक्षर किए, जिसे बैंकॉक घोषणा भी कहते हैं। इसके द्वारा क्षेत्रीय आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक सहयोग के लिए दक्षिण-पूर्व एशियाई राष्ट्र संघ (आसियान) की स्थापना हुई।
1967 – 1970 · अफ़्रीका · युद्ध
नाइजीरियाई गृह युद्ध
नाइजीरियाई गृह युद्ध नाइजीरिया और बियाफ्रा गणराज्य के बीच लड़ा गया युद्ध था। बियाफ्रा गणराज्य एक अलगाववादी राज्य था जिसने सन् 1967 में नाइजीरिया से अपनी स्वतंत्रता की घोषणा की थी। अतः इसे बियाफ्रान युद्ध के रूप में भी जाना जाता है। नाइजीरिया का नेतृत्व जनरल याकूब गॉवोन ने किया था और बियाफ्रा का नेतृत्व लेफ्टिनेंट कर्नल चुकुवेमेका "एमेका" ओडुमेग्वु ओजुकु द्वारा किया गया। यह संघर्ष राजनीतिक, जातीय, सांस्कृतिक और धार्मिक तनाव के परिणामस्वरूप हुआ जो सन् 1960 से सन् 1963 तक यूनाइटेड किंगडम द्वारा नाइजीरिया के वि-उपनिवेशीकरण से पहले हुआ था। सन् 1966 में युद्ध के तात्कालिक कारणों में एक सैन्य तख्तापलट, एक जवाबी तख्तापलट और इग्बो विरोधी नरसंहार शामिल थे। उत्तरी क्षेत्र से जीवित इग्बो लोगों के नरसंहार और पूर्वी क्षेत्र में इग्बो होमलैंड्स की ओर पलायन ने पूर्वी क्षेत्र के नेतृत्व को यह निष्कर्ष निकालने के लिए प्रेरित किया कि नाइजीरियाई संघीय सरकार उनकी रक्षा नहीं करेगी और वे एक स्वतंत्र बियाफ्रा में अपनी रक्षा करनी चाहिए।
1968 · भारत · अर्थव्यवस्था
हरित क्रांति (भारत)
Harit kranti ke charan
1968 · उत्तर अमेरिका · राजनीति
परमाणु अप्रसार संधि
परमाणु अप्रसार संधि को एनपीटी के नाम से जाना जाता है। इसका उद्देश्य विश्व भर में परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने के साथ-साथ परमाणु परीक्षण पर अंकुश लगाना है। १ जुलाई १९६८ से इस समझौते पर हस्ताक्षर होना शुरू हुआ। अभी इस संधि पर हस्ताक्षर कर चुके देशों की संख्या १९१ है। जिसमें पांच के पास नाभिकीय हथियार हैं। ये देश हैं- अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस और चीन। सिर्फ पांच संप्रभुता संपन्न देश इसके सदस्य नहीं हैं। ये हैं- भारत, इजरायल, पाकिस्तान द.सुदान और उत्तरी कोरिया। एनपीटी के तहत भारत को परमाणु संपन्न देश की मान्यता नहीं दी गई है। जो इसके दोहरे मापदंड को प्रदर्शित करती है। इस संधि का प्रस्ताव आयरलैंड ने रखा था और सबसे पहले हस्ताक्षर करने वाला राष्ट्र है फिनलैंड। इस संधि के तहत परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र उसे ही माना गया है जिसने १ जनवरी १९६७ से पहले परमाणु हथियारों का निर्माण और परीक्षण कर लिया हो। इस आधार पर ही भारत को यह दर्जा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नहीं प्राप्त है। क्योंकि भारत ने पहला परमाणु परीक्षण १९७४ में किया था। उत्तरी कोरिया ने इस सन्धि पर हस्ताक्षर किये, इसका उलंघन किया और फिर इससे बाहर आ गया।
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अब भी जारी
लगभग इसी समय
- स्पुतनिक-१1957
- क्यूबा की क्रांति1953 – 1959
- बांडुंग सम्मेलन1955
- स्वेज़ संकट1956
- 1956 की हंगरी क्रांति1956
- योम किप्पुर युद्ध1973
- 1973 तेल संकट1973
- 1973 का चिली तख़्तापलट1973
- बांग्लादेश मुक्ति युद्ध1971
- कार्नेशन क्रांति1974
- मुस्कुराते बुद्ध1974
- सिडनी ओपेरा हाउस1973
इस अवधि के अन्य मानचित्र
- युद्ध मानचित्रअल्जीरियाई युद्ध
- युद्ध मानचित्रवियतनाम युद्ध
- युद्ध मानचित्रनाइजीरियाई गृह युद्ध
- युद्ध मानचित्रछः दिन का युद्ध
- आविष्कार मानचित्रअरपानेट
- महामारी मानचित्रतीसरी प्लेग महामारी
- आविष्कार मानचित्रलेज़र
- महामारी मानचित्रसातवीं हैजा महामारी